पत्रकार हित की बात तो हर पत्रकारों का यूनियन करता है लेकिन पत्रकार हित के लिए आवाज़ उठाने से दूर रहते है। साल में कई मामले पत्रकार से अभद्र व्यवहार, मारपीट, जान से मारने की धमकी, जान से मारने की कोशिश यहां तक की जान से मार देने की घटनाएं सामने आती है।
ताज़ा उदाहरण संत कबीर नगर के सेहुड़ा चौराहे पर पुलिस की लापरवाही से दिन दहाड़े पत्रकार जावेद अहमद पर प्राण घातक हमला कुछ दबंग व्यक्तियों ने कर दिया। इस हमले में पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गया और दाहिने पैर की हड्डी पूरी तरह टूट गई है।
इस घटना पर अभी तक कोई संघठन सामने नही है। केवल संघटन बनाने में, पद लेने में और डोनेशन लेने में आगे रहते है पत्रकारों के हित मे धरातल पर कोई धरना, प्रदर्शन नही यहां तक घटनाओ पर लिखित आवाज पुलिस अधीक्षक और शासन प्रशासन तक नही देते है इस तरह के यूनियन, संगठन केवल नाम के और नपुंसक है।
अब भी वक़्त है पत्रकारों के हित मे केवल बात न करे बल्कि हकीकत में हित के लिए एकजुट हो। पद लेकर घूमने से कुछ नही बनेगा। कल को इस तरह की घटना किसी के साथ हो सकती है।
आगे की रिपोर्ट में इस तरह के पत्रकार संघठन, यूनियन के नाम को सामने लाया जाएगा। जिस में जिला अध्यक्ष एक सरकारी डॉक्टर है। सरकारी डॉक्टर होते हुवे भी पत्रकार यूनियन का अध्यक्ष, सदस्य यहां तक पत्रकार बन कर बैठे है जबकि सरकारी नौकरी वाला कभी स्वतंत्र पत्रकार नही हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि डॉक्टर साहब अपने निजी मेडिकल संस्थान और स्कूलों में फर्जीवाड़ा पर पर्दा डालने के लिये पत्रकार बनकर बैठे है।
बहरहाल कुछ रिपोर्ट और साक्ष्य के साथ मिलते है अगली रिपोर्ट में।
AKP न्यूज़ 786 पत्रकारों के साथ हो रही घटनाओं का घोर निंदा करता है और शासन, प्रशासन से कठोर कार्यवाही की माँग करता है।
एजाज़ आलम खान की रिपोर्ट
AKP न्यूज़ 786


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