"कप्तानगंज में कांवड़ यात्रा के दौरान बवाल, पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर उठी उंगलियां"
उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले से इस समय एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। सावन माह के दौरान निकाली जा रही कांवड़ यात्रा के बीच धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला विवाद इतना बढ़ गया कि स्थिति पुलिस और श्रद्धालुओं के आमने-सामने आने तक पहुंच गई।
यह घटना बस्ती के कप्तानगंज थाना क्षेत्र की है, जहाँ कांवड़ यात्रा के दौरान सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन सोमवार को अचानक माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब अन्य समुदाय के दो युवकों द्वारा मंदिर को लेकर विवादित और भड़काऊ बयान दिए जाने की बात सामने आई।
श्रद्धालुओं के अनुसार, युवकों ने कथित तौर पर मंदिर खरीदने और तोड़ने जैसी आपत्तिजनक बातें कहीं। इस बयान से कांवड़ियों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया।
देखते ही देखते कहासुनी बढ़ी और मामला हिंसक झड़प में बदल गया।
पुलिस मौके पर पहुंची और एक युवक को हिरासत में ले लिया गया।
लेकिन इससे भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। कांवड़ियों की मांग थी कि आरोपी को या तो मौके पर सज़ा दी जाए या फिर उन्हें सौंपा जाए।
स्थिति इस कदर उग्र हो गई कि ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए और पुलिस से तीखी बहस भी देखने को मिली।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया है।
स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाते हुए एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात कर दिया है।
गौरतलब है कि इसी क्षेत्र में पहले भी उच्च न्यायालय के एक जज पर भीड़ द्वारा हमला किया जा चुका है। उस समय उनकी गाड़ी क्षतिग्रस्त की गई थी। इस मामले में कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी और कई लोगों को जेल भी भेजा गया था लेकिन उस घटना से सबक लेने के बजाय, इस बार भी स्थानीय पुलिस की तैयारी और सतर्कता पर सवाल उठ रहे हैं। क्या प्रशासन ने पुरानी घटनाओं से कोई सीख नहीं ली?
यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं बल्कि धार्मिक आस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़ा सवाल बन चुका है।
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