बस्ती। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इतिहास के पन्नों से गायब कर दिए गए बस्ती जनपद के ऐतिहासिक गांव महुआ डाबर की गाथा को फिर से जीवित करने वाले वरिष्ठ इतिहास प्रेमी अब्दुल लतीफ अंसारी की जुबानी सुनने का अवसर एक विशेष वेबीनार में मिलने जा रहा है।
वेबीनार का शीर्षक है – "महुआ डाबर की कहानीः लतीफ अंसारी की जुबानी", जो 3 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजे आयोजित होगा। इस आयोजन का संयुक्त संयोजन महुआ डाबर संग्रहालय एवं डॉ. जनक सिंह सोशियो कल्चरल एंड एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा किया जा रहा है।
लतीफ अंसारी ने 8 फरवरी 1994 को मुंबई से बस्ती जिले के बहादुरपुर ब्लॉक में स्थित महुआ डाबर गांव आकर अपने पुरखों से सुनी कहानियों को साक्ष्य में बदलने का संकल्प लिया। वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने वर्ष 2010 में यहां औपचारिक उत्खनन करवा कर इस गांव की ऐतिहासिक हैसियत को देश-दुनिया के सामने लाने में सफलता प्राप्त की।
इस वेबीनार में लतीफ अंसारी अपने व्यक्तिगत अनुभव, संस्मरण और शोध यात्रा को साझा करेंगे, जिससे इतिहास के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और स्वतंत्रता संग्राम में रुचि रखने वाले जनमानस को नई दृष्टि और प्रेरणा मिलेगी।
वेबीनार में देशभर से इतिहासकारों, शिक्षाविदों, शोध छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता अपेक्षित है।
रिजवान खान की रिपोर्ट


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