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"नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भयानक भगदड़! 18 की दर्दनाक मौत – दिल दहला !"

 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मौत का तांडव! भगदड़ में 18 की दर्दनाक मौत, 50 से ज्यादा घायल!

"एक छोटी सी गलती और तबाह हो गई दर्जनों जिंदगियां!"

क्या आप सुरक्षित हैं जब अगली बार स्टेशन पर जाएं?

प्लेटफार्म बदलने की अचानक घोषणा से मची अफरातफरी!

भागते लोग, गिरते बदन, रौंदती भीड़... चीख-पुकार से गूंज उठा पूरा स्टेशन!

सरकार और रेलवे प्रशासन की लापरवाही, कब तक मरेंगे बेगुनाह?

क्या सरकार सिर्फ मुआवजा देकर पल्ला झाड़ लेगी या कोई बड़ी कार्रवाई होगी?

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़, 18 की मौत, 50 से ज्यादा घायल

नई दिल्ली: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार की रात को अचानक प्लेटफार्म बदलने की घोषणा के बाद मची भगदड़ में 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब यात्रियों को ऐन मौके पर बताया गया कि उनकी ट्रेन किसी अन्य प्लेटफार्म से रवाना होगी। हजारों यात्री अपने भारी सामान के साथ जल्दबाजी में दूसरे प्लेटफार्म की ओर दौड़ पड़े, जिससे स्टेशन पर अफरातफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रेलवे प्रशासन ने ट्रेन के प्रस्थान से कुछ ही मिनट पहले प्लेटफार्म बदलने की घोषणा की। पहले से ही भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर अचानक हुए इस ऐलान से यात्री घबरा गए। प्लेटफार्म पर जगह कम थी, ऊपर से बड़ी संख्या में लोग अचानक सीढ़ियों, पुल और गलियारों से दौड़ पड़े। इसी दौरान कुछ यात्री संतुलन खोकर गिर पड़े, और पीछे से आ रही भीड़ ने उन्हें कुचल दिया। कई लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए, जिससे हालात और बिगड़ गए।

घटना के तुरंत बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। यात्रियों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन ने कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की थी, न ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाकर्मी पर्याप्त संख्या में मौजूद थे।



इस हादसे के बाद सरकार और रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए थे। भीड़ नियंत्रण के उपायों की कमी और अंतिम क्षण में प्लेटफार्म बदलने की अव्यवस्थित प्रक्रिया पर रेलवे की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।

हादसे के बाद सरकार ने मुआवजे की घोषणा की है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि केवल मुआवजा देने से कुछ नहीं होगा। सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रशासन संवेदनशीलता और अनुभव की कमी का शिकार है।

 सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक आम लोगों को इस लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी? 

एजाज़ आलम खान की रिपोर्ट

AKP न्यूज़ 786



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