🌹 मेरी आत्मकथा (पार्ट 2)
✍️ सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी
🏡 जन्म और परिवार
अल्हम्दुलिल्लाह, मेरा नाम सूफ़ी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी है।
मैं उत्तर प्रदेश के ज़िला बस्ती से ताल्लुक़ रखता हूँ।
मेरे वालिद-ए-मोहतरम का नाम मोहम्मद जावेद आलम ख़ान है।
बचपन से ही मेरे दिल में इल्म-ए-दीन सीखने, मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ और इंसानियत की खिदमत करने का शौक़ पैदा हुआ।
मैने दुनियावी और दीनी दोनों तालीम हासिल की है।
🌸 रूहानी सफ़र
मेरा जुड़ाव सिलसिला-ए-क़ादरिया से है।
मेरे पीर/मुर्शीद पीरान ए पीर हजरत सय्यद शेख अब्दुल क़ादिर जिलानी रजिअल्लाहु तआला अन्हु है।
मेरी मोहब्बत और निस्बत ग़ौसुल आज़म, पीरान ए पीर हजरत सय्यद शेख अब्दुल क़ादिर जिलानी रजिअल्लाहु तआला अन्हु से है।
> “ग़ौस-ए-पाक रजिअल्लाहु तआला अन्हु की तालीमात ने मुझे यह सिखाया कि सच्चाई, मोहब्बत, अमन और इंसानियत से बढ़कर कोई दौलत नहीं।”
मैं ईद मिलादुन्नबी ﷺ, ग्यारहवीं शरीफ़ और सूफ़ियाना महफ़िलों के ज़रिए मोहब्बत और अमन का पैग़ाम फैलाने की कोशिश करता हूँ।
🌸 औलिया-ए-किराम से रूहानी निस्बत
अल्हम्दुलिल्लाह, मेरी रूहानी निस्बत ग़ौसुल आज़म रज़िअल्लाहु तआला अन्हु से होते हुए हिंदुस्तान की सरज़मीन पर तशरीफ़ लाने वाले औलिया-ए-किराम की ख़िदमतगुज़ारी और उनकी बारगाह में हाज़िरी का भी शरफ़ हासिल हुआ।
मैं अक्सर हाज़िरी देता हूँ:
🕌 हजरत सैय्यद मुईनुद्दीन हसन चिश्ती ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैहि, अजमेर शरीफ़
🕌 हजरत मखदूम अशरफ़ सिमनानी रहमतुल्लाह अलैहि, किछौछा शरीफ़
🕌 हजरत सैय्यद सालार मसूद ग़ाज़ी रहमतुल्लाह अलैहि, बहराइच शरीफ़
🕌 हजरत वारिस अली शाह रहमतुल्लाह अलैहि, बाराबंकी
🕌 हजरत लतीफ़ शाह रहमतुल्लाह अलैहि, महुआ डाबर (बस्ती)
और इसके अलावा दुनिया के तमाम औलिया-ए-किराम की मजारों से मुझे रूहानी निस्बत और मोहब्बत हासिल है।
> औलिया-ए-किराम की बारगाहों में हाज़िरी से दिल को सुकून और रूह को ताज़गी मिलती है। उनकी तालीमात अमन, मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम देती हैं।
🤲 मेरी रूहानी दुआ
मैं हर वक़्त अल्लाह तआला से यह दुआ करता हूँ:
✨ तमाम मुसलमानों के दिलों में मोहब्बत और भाईचारा पैदा हो।
✨ फ़िरक़ाबंदी, नफ़रत और तफ़रक़ा ख़त्म हो।
✨ दुनिया में अमन, शांति और इंसानियत क़ायम रहे।
✨ हिन्दुस्तान और पूरी दुनिया में मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ और औलिया-ए-किराम की तालीमात आम हों।
> “या अल्लाह! हमें एक-दूसरे से मोहब्बत करने वाला बना, इंसानियत की ख़िदमत करने वाला बना और हमें औलिया-ए-किराम के नक़्श-ए-क़दम पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।”
📚 मेरी तालीमी कोशिश
नई नस्ल की तालीम और तरबियत के लिए मैंने दारुल उलूम इस्लामिया फैज़ाने आलम, दमया परसा, बस्ती की बुनियाद रखी।
यहाँ बच्चों और नौजवानों को इल्म-ए-दीन, अच्छे अख़लाक़ और मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ की तालीम दी जाती है।
गरीब और यतीम बच्चों को मुफ़्त पढ़ाई दी जाती है।
इस मदरसे की मान्यता 2014 में ली गई।
🌍 आलम रूहानी मिशन (रजिस्टर्ड)
मैंने आलम जन सेवा संस्थान के ज़रिए आलम रूहानी मिशन, बस्ती की बुनियाद रखी।
इस मिशन का मक़सद है:
अमन और भाईचारा
मोहब्बत और इंसानियत
इस्लाही पैग़ाम को अवाम तक पहुँचाना
> “मेरा मिशन है – दिलों को जोड़ना, न कि तोड़ना।”
✨ सामाजिक सेवाएँ
गरीब, यतीम, बेवा, विकलांग और खानाबदोशों को मुफ़्त अनाज वितरण करना।
हर साल 20 फरवरी को "अनाज दिवस" (2019 से) मनाया जाता है
हर इतवार और जुमेरात को क़ुरआन-हदीस और तिब्बे-नबवी से रूहानी इलाज और दुआएँ , तरकीब निःशुल्क।
बेसहारा और विधवा महिलाओं की मदद
अनाथ बच्चों की तालीम और किताबों का इंतज़ाम
ग़रीब घरों में शादियों में सहयोग और दहेज रहित निकाह की तर्जीह
समय-समय पर शासन और प्रशासन से अहम मुद्दों पर आवाज़ बुलंद करना ताकि समाज में अमन-ओ-शांति कायम रहे
📺 मीडिया प्लेटफ़ॉर्म
AKP News 786
(आलम की पुकार समाचार पत्र) – RNI से रजिस्टर्ड
इसके ज़रिए अवाम तक:
दुनियावी, दीनी और समाजी ख़बरें
तालीमी और इस्लाही कंटेंट
नौजवानों के लिए रहनुमाई
पेश की जाती हैं।
🎥 डिजिटल दावत-ए-दीन
YouTube Channel
Sufi Aijaz Qadri Official
Aalam Ruhani Mission
इन प्लेटफ़ॉर्म्स पर समय-समय पर इस्लाही और रूहानी बयान पेश किए जाते हैं।
ताकि नौजवान और अवाम सही राह की तरफ़ मुतवज्जेह हों और अमन-ओ-मोहब्बत का पैग़ाम फैले।
🌹 ईद-ए-मिलादुन्नबी ﷺ
हर साल मैं मोहब्बत और इश्क़ के साथ ईद-ए-मिलादुन्नबी ﷺ का प्रोग्राम आयोजित करता हूँ।
इसमें:
✨ नात-ख़्वानी
✨ इस्लाही तक़रीरें
✨ मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ का पैग़ाम
✨ अमन-ओ-भाईचारा का संदेश
अवाम तक पहुँचाया जाता है।
🕌 मेरा इस्लाही पैग़ाम
मैं हमेशा अवाम से यही कहता हूँ:
“मुसलमान फ़िरक़ों में न बँटें।”
“सब मिलकर एक रहें और सिर्फ़ सुन्नी मुसलमान कहलाएँ।”
“नौजवान इल्म और अख़लाक़ की तरफ़ ध्यान दें।”
“इंसानियत की खिदमत और मोहब्बत को ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ।”
🌺 नतीजा
मेरी ज़िंदगी का असल मक़सद मोहब्बत-ए-इलाही, मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ और इंसानियत की खिदमत है।
मैं अल्लाह तआला से दुआ करता हूँ कि वह मेरी कोशिशों को कबूल फ़रमाए और मुझे अमन-ओ-मोहब्बत का पैग़ाम फैलाने की तौफ़ीक़ देता रहे।
💠 “दीन की असल तालीम मोहब्बत और इंसानियत है, और मेरी पूरी ज़िंदगी इसी तालीम को आम करने में गुज़र रही है।”
✍️ सूफी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी
📞 संपर्क नंबर: 9451437422

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