बस्ती--दारुल उलूम इस्लामिया फैजाने आलम दमया परसा में रमज़ान के मुबारक मौके पर प्रिंसिपल एजाज़ आलम खान क़ादरी ने सभी तालिब-ए-इल्म और मौजूद अध्यापको को बताया कि माहे रमज़ान में तीन अशरा होता है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नुम से निजात है। इस मुबारक महीने में अल्लाह को राजी कर लो। अभी मगफिरत सस्ती है।
माह रमज़ान ये बताता की बाकी ग्यारह माह ज़िन्दगी कैसे जीना है। रमज़ान मुबारक महीने में हर तरह की बुराइयों से दूर रहते हुवे हम सब रोज़ा रखते है। जिस तरह हम माहे रमज़ान में गुनाह से दूर, ग़ीबत से दूर, बुरी बातों व आदतों से दूर रहते हुवे रोज़ा रखते है और दिनों-रात खूब इबादत करते है। क़ुरान पाक की तेलावट, पांचो वक़्त की नमाज़, तरावी की नमाज़, तहज्जुद की नमाज़ जिक्र, फिक्र में रहते है उसी तरह बाकी महीनों में भी गुनाह से दूर रहना चाहिए और पाँच वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ हर हाल में अदा करनी चाहिए।
मुसलमान इबादत के लिए दुनिया मे आया है हमे गुनाह से दूर रहते हुवे इबादत करनी चाहिए।
उस्ताद एजाज़ ने यह भी बताया कि इस माह में नेकियों का अज्र सत्तर गुना बढ़ जाता है। ऑफर है खूब नेकी करके अल्लाह को राजी कर लो। मगफिरत सस्ती है। सदका, खैरात, जकात बेहद जरूरतमंदो को दो। देने में जल्दी करो जिससे गरीबो के घर मे भी रमज़ान पर अच्छे पकवान इफ्तार के वक्त मौजूद रहे और उनकी ईद अच्छी हो।
इस मौके पर मुख्य रूप से आलिमा फ़ाज़िला मेराजुन निशा क़ादरी, शाहीन बनो, मास्टर मकसूद अहमद खान, मास्टर इबरार अहमद व सैकड़ो विद्यार्थी मौजूद रहे।


0 Comments