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🌙 1500 Years Eid Milad-un-Nabi 2025 DIFA | Historic Jashn & Mehfil-e-Naat

 दारुल उलूम इस्लामिया फैज़ाने आलम, दमया परसा में जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बड़ी धूमधाम, रूहानी गर्मजोशी और मोहब्बत-ओ-अकीदत के साथ मनाया गया।

इस मौके पर नाज़िम ए आला जनाब जावेद आलम ख़ान की मौजूदगी रही, जबकि पूरे प्रोग्राम की रहनुमाई सदर व प्रिंसिपल सूफी एजाज़ आलम ख़ान क़ादरी साहब ने फरमाई। दुनिया भर में इस साल हुज़ूर ए अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश का 1500 वाँ जश्न अकीदत के समुंदर में डूबकर मनाया गया, और यही जज़्बा यहाँ भी नज़र आया।


जलसे में तशरीफ़ लाए उलमा-ए-किराम ने कुरआन व हदीस की रोशनी में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत ओ सुन्नत पर दिलनशीं बयानात पेश किए। उन्होंने फरमाया 

ईमान पर क़ायम रहना ही मुसलमान की पहचान है।

सुन्नत के मुताबिक़ ज़िंदगी ही असली कामयाबी है।

आपसी मोहब्बत, भाईचारा और एक-दूसरे के सुख-दुख में शरीक रहना इस्लाम की बुनियादी तालीम है

नात ख़्वानी का सिलसिला जब शुरू हुआ तो माहौल नूरानी कैफियत से भर गया। नात-ख़्वान हज़रात ने ऐसी मोहब्बत-भरी आवाज़ों में कलाम पेश किए कि दिलों में इश्क़ ए रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शमाएँ रोशन हो गईं। बयानों और नातों ने शिरकत करने वालों को रूहानी सुकून बख़्शा।

निज़ामत कारी युनुस ने की।

तिलावत ए कुरआन कारी असलम ने पेश की।

नात ख़्वानी जनाब इस्माइल सालेह पूरी, जनाब मोहम्मद अनस बस्तवी, हाफिज़ अब्दुल हफ़ीज़ बस्तवी।

तकरीर हाफिज़ हैदर, कारी तबरेज़ आलिमी, मौलाना आमिर रज़ा क़ादरी साहब क़िब्ला समेत कई उलमा व मुकामी तालिब ए इल्म ने शिरकत की।

ब्यूरो रिपोर्ट 

AKP न्यूज 786

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