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मुश्किलों का हल आत्महत्या नहीं – सूफी एजाज़ आलम खान कादरी।

 

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर दारुल उलूम

 इस्लामिया फैजाने आलम दमया परसा में

 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

मुश्किलों का हल आत्महत्या नहीं – सूफी एजाज़ आलम खान कादरी।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर दारुल उलूम इस्लामिया फैजाने आलम दमया परसा, बस्ती में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संस्थान के प्रिंसिपल सूफी एजाज़ आलम खान कादरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आत्महत्या जैसी सामाजिक और धार्मिक बुराई से बचने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि इंसान को हर हाल में अपने मानसिक विचारों पर नियंत्रण रखना चाहिए। सकारात्मक सोच, अच्छे विचार, अच्छा बोलना और अच्छे कर्म ही जीवन को संवार सकते हैं। नकारात्मक विचार इंसान को गलत राह पर ले जाते हैं। चिंता और मायूसी से दूर रहकर हमेशा उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम बढ़ाना चाहिए।

सूफी साहब ने विशेष रूप से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि "इस उम्र में बच्चों का मन कोमल होता है और छोटी-छोटी बातों से प्रभावित हो जाता है। कई बार परीक्षा में असफलता या कम अंक आने पर छात्र-छात्राएँ आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा लेते हैं, जो बिल्कुल गलत है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का नया अवसर है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि नशे और किसी भी चीज की जरूरत से ज्यादा आदत भी आत्महत्या के पीछे बड़ा कारण बनती है। किसी भी स्थिति में इंसान को धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए। आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं बल्कि एक सामाजिक अपराध और धार्मिक पाप है।


सूफी एजाज़ आलम खान कादरी ने अंत में सभी विद्यार्थियों से अपील की कि वे हमेशा सकारात्मक सोच के साथ मेहनत करें, जीवन में आगे बढ़ें और कठिनाइयों का सामना हिम्मत से करें। तभी कामयाबी मिलेगी और दुनिया सलाम करेगी।

इस कार्यक्रम ने मकसूद अहमद खान, मजबूल्लाह, परवेज अहमद, सोनी चौधरी, अमीना खातून सहित सैकड़ों विद्यार्थी मौजूद रहे।

ब्यूरो रिपोर्ट 

AKP न्यूज 786

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