बस्ती सूफी एजाज़ आलम खान कादरी अध्यक्ष आलम रूहानी मिशन के निवास जयपुरवा पर ग्यारहवीं शरीफ की महफिल सजाई गई।
हजरत सय्यद शेख अब्दुल कादिर जिलानी रज़ी अल्लाह ताला अन्हु की याद में ग्यारहवीं शरीफ की महफिल सजाई गई।
महफिल में सरपरस्त पीर जावेद आलम खान खादिम रसूल अल्लाह
खलीफा फकीर शाह हजरत मोहम्मद अली रहमतुल्लाह अलैह की मौजूदगी रही।
हाफिज और कारी मोहम्मद असलम कादरी ने महफिल की शुरुआत कुरान पाक की तिलावत से की और दिलकश अंदाज में गौसिया कलाम में नात पाक पेश करके महफिल में चार चांद लगा दिया और सीरत ए गौस पाक पर रोशनी डालते हुए कहा कि गौस ए पाक हसनी हुसैनी नसब से है। गौस पाक का जन्म शुक्रवार, 1 रमज़ान 470 हिजरी मुताबिक 1077 ईस्वी को वर्तमान ईरान के जीलान शहर में हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन बगदाद में बिताया, जहाँ वे एक सूफ़ी संत और हम्बली न्यायसूत्र परंपरा के विद्वान थे। इसी क्रम में मौलाना मोहम्मद आमिर रजा कादरी ने महफिल में प्यारे रसूल हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नात पढ़ कर महफिल में मौजूद आशिकों का दिल जीत लिया और बताया कि हजरत सय्यद शेख अब्दुल कादिर जिलानी रज़ी अल्लाह ताला अन्हु पैदाइशी वली है।
पैदाइश से विसाल तक अल्लाह की रहमत से करामात बेशुमार है। जिस तरह से प्यारे रसूल हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अंबिया अलैहिस्सलाम के सरदार है उसी तरह से गौस पाक वालियों के सरदार है। अल्लाह पाक ने गौस पाक का मर्तबा बुलंद किया है। इसी क्रम में इस मौके पर सूफी एजाज़ आलम खान कादरी ने कहा कि सभी मुसलमान को आपस में मिलजुल कर रहना चाहिए। फिरको में नहीं बटना चाहिए। केवल प्यारे रसूल और सहाबा की सुन्नत पर चलना चाहिए। सुन्नत पर चलने में ही दुनिया और दीन में भलाई है। जगह के नाम से खुद का पहचान नहीं मशहूर करना चाहिए।
अल्लाह पाक को ईमान वाला पसंद है। अल्लाह ने हमे मुसलमान कहा है। हमें चाहिए कि हकीकी मुसलमान बन कर रहे।
प्यारे रसूल हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नतों पर चलना हर मुसलमान पर फर्ज है। हर मुसलमान सुन्नी मुसलमान है।
महफिल में मज़ीबुल्लाह, मोहम्मद असलम, रियाज अहमद, फिरोज सभासद, आफताब आलम खान, शादाब आलम खान, शहजाद आलम खान, फारूख इस्लाम, फारूक अहमद, रिजवान खान पत्रकार सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
ब्यूरो रिपोर्ट
AKP न्यूज 786

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