4अक्टूबर2025🆙बस्ती➡️जनपद के जिला चिकित्सालय से थोड़ी दूरी पर बस स्टैंड मार्ग स्थित एक लान में दशहरा पश्चात शुक्रवार को डांडिया घुंची का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं ने डांडिया पारंपरिक नृत्य कर लोगों का मन मोहा विभिन्न धुनों पर आयोजित डांडिया नृत्य ने थिरकने पर मजबूर कर दिया बताते चलें कि डांडिया नृत्य ऊर्जावान, सामाजिक-धार्मिक लोक नृत्य है, जो विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान खेला जाता है। इसमें नर्तक हाथों में दो छड़ियाँ (डांडिया) पकड़ते हैं, जिन्हें एक साथ थपथपाते हुए घेरे में नाचते हैं।
कार्यक्रम का आरंभ डॉ.शैलजा सतीश, कविता श्रीवास्तव, अभिषेक श्रीवास्तव, शुभम गुप्ता,संदीप श्रीवास्तव, रिंकू कसौधन,आंशि, शालिनी, द्वारा पंडित सचिन शास्त्री के दुर्गा माता की अखंड वेद मित्रों से अर्पित वंदना तथा महा आरती से प्रारंभ किया गया
👉ऐतिहासिक महत्व 👇
डांडिया नृत्य, हजारों साल पुराना रास है, जिसे देवी शक्ति का सम्मान करने के लिए किया जाता है। यह नृत्य देवी और महिषासुर के बीच हुए युद्ध को अभिनय के रूप में प्रस्तुत करता है नर्तक दो रंगीन डंडियों, जिन्हें 'डांडिया' कहते हैं, को लयबद्ध तरीके से एक-दूसरे से टकराकर नृत्य करते हैं. यह देवी दुर्गा द्वारा राक्षस महिषासुर के वध का उत्सव मनाने का प्रतीक है. यह नृत्य तेज, ऊर्जावान और खुशी से भरा होता है, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों भाग लेते हैं. जनपद में इसका आयोजन मास्टर शिव के द्वारा विगत चार वर्षों से लगातार कराया जा रहा जिसमें सैकड़ों महिलाएं एवं पुरुष स्वेच्छा से प्रतिनिधित्व करते हैं इस नवरात्रि के बाद दशहरे के दूसरे दिन यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें महाराष्ट्र की मुख्य अतिथि डांडिया नर्तकी निमकी जी(किन्नर) सहयोगियों सहित आमंत्रित थीं डांडिया नर्तकी निमकी जी के आते ही स्वागत सत्कार में ढोल नगाड़े बजाये गये मां दुर्गा के चित्र पर धूप दीप तथा पुष्पांजलि करते हुए सायंकाल मास्टर शिव ने उत्सवी कार्यक्रम का उद्घाटन किया जहां बेहतर ढंग से संवरी महिलाओं एवं किशोरियों युवतियों ने डांडिया क्रीड़ा का प्रतिनिधित्व किया चार घण्टे के इस कार्यक्रम में भोजन का भी प्रबंध किया गया था मास्टर शिव कार्यक्रम प्रमुख ने जानकारी देते हुए बताया कि डांडिया एवं घुंची का कार्यक्रम मां दुर्गा को समर्पित है जिसको पिछले चार वर्षों से लगातार कराया जा रहा है लोगों का अपेक्षित सहयोग मिल रहा है जिससे परंपरा की शुरुआत सकारात्मक हुआ है भविष्य में भी बेहतर करने की उम्मीद है ।
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मास्टर शिव कथक गुरु, अभिषेक श्रीवास्तव विरल ने बताया कि उत्सव में आए सभी अतिथियों का स्वागत अभिनंदन, तोरण द्वार पे भांगडे के उमंग ताल, तिलक एवं पटके के सारस्वथामु सम्मान से हुआ,साथ ही किन्नर समाज के,अर्धांग परिवार शक्तियों का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ ।उत्सव में तीनों पीढ़ियों के, लिए तकनीकी परिसर,की समुचित सीमा की व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहा। डॉक्टर शैलजा सतीश राजकीय महाविद्यालय प्रोफेसर, कविता श्रीवास्तव ने बताया कि, नवरात्रि में गरबा डांडिया का विशेष महत्व है, इसे युवा पीढ़ीयो के द्वारा बड़े ही धूमधाम तथा विशेष सांस्कृतिक वस्त्र सज्जा वं भक्ति रस के साथ मनाया जाता है,। या माता को प्रसन्न और प्रकट करने की सच्ची साधना है।
शुभम गुप्ता, संदीप श्रीवास्तव.ने बताया कि गरबा डांडिया का प्रचलन गुजरात राजस्थान ही नहीं अपितु संपूर्ण भारत में इसे जो प्रसिद्धि मिल रही है । संस्कृति के आदान-प्रदान का नवीनीकरण होगा।। इस अवसर पर हिमांशु सेन, मुख्य राजस्व अधिकारी कीर्ति प्रकाश भारती , काजु श्रीवास्तव अधिवक्ता, मीनाक्षी, रागनी, खुशबू आर्या, डॉ.रोली आर्या, पवन कुशवाहा, तनिष्क आर्या, मुकेश कुशवाहा, सत्येंद्र श्रीवास्तव, शक्ति भट्ट, प्रियंका भट्ट, अजय श्रीवास्तव. अश्विनी श्रीवास्तव, अभिनव उपाध्याय, अरिहंत, राजेश चित्रगुप्त, रेखा चित्रगुप्त, दुर्गेश सोनी, रानी सोनी, संध्या दिक्षित, प्रिया कसौधन,साधना यदुवंशी, गोपाल, आशीष गुप्ता अमन, विशेष श्रीवास्तव ,ओम ,श्रद्धा शुक्ला, शिखा त्रिपाठी, कृष्णा ,राहुल, आदित्य, रामानंद, शिव नारायण ,आदि कला नृत्य प्रेमी उपस्थित रहे।
रिजवान खान की रिपोर्ट
AKP न्यूज 786

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