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विश्व रेबीज दिवस पर संगोष्ठी: खरोच से भी हो सकती है मौत, जागरूकता जरूरी

 क्या आपने कभी सोचा है कि  कुत्ता -बिल्ली के खरोच से मनुष्य की जान जा सकती है तो सही सोचा है जान जा सकती है।

विश्व रेबीज दिवस पर संगोष्ठी: खरोच से भी हो सकती है मौत, जागरूकता जरूरी

       उक्त बातें दीदी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सिविल लाइंस कार्यालय पर विश्व रेबीज दिवस पर आयोजित एक संगोष्ठी में भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय महामंत्री रामानंद "नन्हे "ने व्यक्त किया उन्होंने कहा कि दुनिया में रेबीज नाम की यह बीमारी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है दुनिया भर में फैलने के कारण ही इसे 2007 में लायन हाट्रर्स फाउंडेशन और सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन द्वारा महान वैज्ञानिक लूई पाश्चर की पुण्यतिथि पर मनाने का निर्णय लिया क्योंकि लूई ने ही रेबीज की पहली वैक्सीन दुनिया में विकसित की थी।


  कार्यक्रम के आयोजक डॉ मनोज सिंह ने कहा कि रेबीज जैसे खतरनाक बीमारी से बस्ती जैसे छोटे जिले में सैकड़ो जिंदगी हर साल मौत के गोद में चली जाती है इसे रोकने के लिए समाज को जागरूक होना होगा कुत्ते,बिल्ली और चमगादड़ के काटने या खरोच लगते ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए साथ ही उक्त जानवरों को समय-समय पर पशु अधिकारियों के पास ले जाकर के रेबीज का इंजेक्शन लगवाना चाहिए श्री सिंह ने  कहा कि रेबीज की रोकथाम किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है बल्कि यह काम सबका सामूहिक जिम्मेदारियां का है।

कार्यक्रम का संचालन गणेश कुमार एवं अध्यक्षता पंकज ने किया कार्यक्रम में गोपाल जी, सत्येंद्र कुमार जी,अनुराग, सर्वेश भाई जी, राजू जी सहित दर्जन लोग थे।

यह जानकारी प्रेस विज्ञप्ति द्वारा डॉ मनोज सिंह अध्यक्ष दीदी चैरिटेबल ट्रस्ट पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ जिला उपाध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा,बस्ती ने दी।

रिजवान खान की रिपोर्ट 

AKP न्यूज 786

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